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    Saturday, 8 April 2017

    दहेज के लिए नहीं जलेंगी बेटियां: बिहार में शराबबंदी के बाद अब दहेजबंदी

    पटना [काजल]। वो तारीख थी- 9 जुलाई 2015, जब पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जीविका, आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद अपनी कुर्सी पर बैठकर पानी पी ही रहे थे कि हॉल के एक कोने से धीमी-सी आवाज उठी। राज्य में शराबबंदी करा दीजिए।
    मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के सहयोगी श्रवण कुमार से कुछ पूछा और फिर डायस पर जाकर बोले- इस बार वापस सत्ता में आए तो राज्य में शराबबंदी लागू करेंगे और 16 वीं विधानसभा के चुनाव में जीत के बाद जीविका दीदी और आशा कार्यकर्ताओं से भरी सभा में किया वादा उन्हें याद रहा और उन्होंने इसे पूरा किया।
    इस वादे को पूरा करने के बाद नीतीश कुमार राष्ट्रीय पटल पर एक हीरो के रुप में उभरे, खासकर महिलाओं के बीच उनकी छवि आज भी काफी चर्चित है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि विगत विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को वोट देने वाली महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा रहा।
    अब नीतीश कुमार ने सामाजिक बदलाव के लिए अगला कदम दहेजबंदी के रूप में बढ़ाया है, जो समाज के लिए खासकर समाज की बेटियों के लिए एक बड़ा कदम है, अगर यह भी सख्ती से लागू हो जाए और इस दिशा में सरकार की पहल काम कर जाए तो समाज में क्रांति जैसी ही बात होगी। दहेज प्रथा के दानव ने अबतक जाने कितनी बेटियों की बलि ले ली है।
    जिंदा जला दी गईं बेटियों के लिए ना समाज कुछ कर पाता है ना कानून। दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए वैसे तो हमारे देश में सख्त कानून हैं, लेकिन गाहे-बगाहे कुछ मामले तो अदालत तक पहुंच भी नहीं पाते और कुछ पहुंच भी जाते हैं तो लंबी प्रक्रिया और जांच के पेंच में एेसे फंस जाते हैं कि कम ही बेटियों को न्याय मिल पाता है।
    दहेज, यह एक एेसी सामाजिक कुप्रथा है जो सदियों से हमारे देश में चली आ रही है और वक्त बेवक्त इसका काला सच हमारे सामने आता रहता है। वैसे आज के समय में लोगों की मानसिकता थोड़ी बदली है, लोग बेटे-बेटी में भेद-भाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन एेेसे लोगों का प्रतिशत आज भी कम है।
    अब इस प्राचीन सामाजिक कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए शराबबंदी की ही तरह एक धीमी-सी आवाज निकली है। 3 अप्रैल 2017 को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने पहली बार आधी आबादी से बात कर उनकी समस्याएं सुनीं। महिलाओं ने मुख्यमंत्री को दहेज प्रथा, कॉमन रूम और महिला शिक्षा को लेकर अहम सुझाव दिए।
    लोक संवाद में गुंजन पांडेय ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी की तरह दहेजबंदी का भी कानून बनाया जाए। यह बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल के अंदर कहीं कोने में जाकर बैठ गई। उन्होंने हर साल दहेज के दानवों के भेंट चढी बेटियों के बारे में सोचा होगा और इसे ही अमल में लाने के लिए  महिलाओं की दुख-पीड़ा को समझकर अब दहेजबंदी के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
    शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज कल्याण विभाग के कामकाज की समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध बड़े जागरूकता अभियान की योजना बनाएं।
    अब देखना होगा कि जिस तरह नीतीश कुमार ने शराबबंदी की चुनौती को स्वीकार कर कई घरों को संवार दिया है, एेसे शराबबंदी कानून को पूरी तरह लागू करने वाली नीतीश सरकार अब बिहार में दहेजबंदी कानून को भी उसी तरह लागू कर एक नया इतिहास रचेगी और इस कुप्रथा से बिहार की बेटियों को छुटकारा दिलाएगी क्या? क्या अब बिहार की बेटियां दहेज के लिए अाग के हवाले नहीं की जाएंगी, क्या बेटियों के मां-बाप अब उनके जन्म के बाद जश्न मना सकेंगे।  

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